Monday, May 28, 2018

मैं तुमको कब तक छोड़ु ...

मैं तुमको कब तक छोड़ु
सूरज चाँद सितारों में
घर खेत खलियानों में
धूप छाँव अंधीयारों में
वेद बाईबिल कुरानों में
मंदिर मस्जिद गिरजाद्वारों में
तुम तो बसते हो मेरे हृदय के उजालो मे।
ज्ञान के सितारों में अमन के विचारों मे।
- डॉ मुकेश ओझा
।। मनुर्भव ।।
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Tuesday, May 15, 2018

मैं बनारस हूँ

मै काल हूँ मै ही कालातीत हूँ
मै भूत भविष्य वर्तमान हूँ
मै मृत्यु के लिए प्रसिद्ध हूँ
मै मोक्षदायी हूँ
मै शिव का नृत्य हूँ
मै श्मशान क्षेत्र हूँ
मै गंगा कि कल कल ध्वनि हूँ
मै भैरव का हूँकार हूँ
मै वेद का ऋचा और ज्ञानीयों का ज्ञान हूँ
मै दशाश्वमेघ, मणिकर्णिका और अस्सी घाट हूँ

बनारस एक दुर्लभ शहर है...!!!
मेरा जन्म् महाश्मशान ,
मगर मै जिंदा शहर बनारस हूँ ।
-डॉ मुकेश ओझा

Saturday, April 28, 2018

अपने सपनों को पंख लगा कर उड़ने दो

आज पुनः मेरे विचार कुछ इस प्रकार निकल पड़े।
मैं ध्यान को छोड़ विचारों के साथ निकल पड़ा और मेरे विचार मूर्तरूप धारण कर लिए -
अपने सपनों को पंख लगा कर उड़ने दो
तुम अपने विचारों को सदभाव में बहने दो
यह जीवन एक खेल है इसे केवल खेल खेल में रहने दो
मत कसो इस जीवन को विभिन्न प्रकार के पाखण्डों में इसे वैदिक सभ्यता में ढलने दो
एक बार झाक कर देखो अपने अन्तः चेतना मे इसे परमात्म रंग में रंगने दो
लाभ हानी सफलता असफलताओं को त्यागकर साक्षी भाव मे रहने दो
पक्षीयों के चहचहाहट और तारों के टिमटिमाहट में रहने दो
मत करों अपने आप की तुलना किसी और से क्योंकि तुम अद्वितीय हो अद्वितीय ही रहोगे
तुम अपने आप को केवल अपने ही रंग में रहने दो।
- डॉ मुकेश ओझा
     ।।मनुर्भव।।

Friday, April 27, 2018

मै देखता हूँ जब तुम्हे सूरज चाँद सितारों मे...

मैं कोई कवि या लेखक नहीं परन्तु आज प्रातः अचानक कुछ विचार आये और एक बहुत ही रोचक रूप मे हमारे मन में गूँज गये यथा-

मै देखता हूँ जब तुम्हे सूरज चाँद सितारों मे।
तब सुकून होता है मूझे हृदय के अंधीयारो में।
मैं सूनता हूँ जब तुम्हें पशु-पक्षी और हवाओं के सरसराहट मे।
तब याद आती है तुम्हारी हृदय के अंधीयारो में।
मै पढता हूँ जब तुम्हें गीता वेद पुराणों में
तब महसूस होते हो तुम हृदय के अंधीयारो में।
जब सोचता हूँ जब तुम्हें अपने विभिन्न विचारों में
तब एक छवि खिंच जाती है हृदय के अंधीयारो में।
जब प्रतिबिंबीत होते हो तुम धूप छाँव अंधीयारों में
तब संगीत प्रतिध्वनी होने लगता है हृदय के अंधीयारो मे।

-डॉ मुकेश ओझा
।। मनुर्भव ।।

Monday, April 23, 2018

१०लकार

🌹 #१०लकार_का_अनमोल_ज्ञान :--🌹

>>> संस्कृत में काल दश भागों में विभाजित है जिनको दश लकार कहा जाता है :--

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०१ ) लट् ---- ल् + अ + ट्
०२ ) लिट् ---- ल् + इ + ट्
०३ ) लुट् ---- ल् + उ + ट्
०४ ) लृट् ---- ल् + ऋ + ट्
०५ ) लेट् ---- ल् + ए + ट्
०६ ) लोट् ---- ल् + ओ + ट्
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०७ ) लङ् ---- ल् + अ + ङ्
०८ ) लिङ्---- ल् + इ + ङ्
०९ ) लुङ्---- ल् + उ + ङ्
१० ) लृङ्---- ल् + ऋ + ङ्

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#इनको_स्मरण_करने_की_विधी_ये_है_कि :-
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ल् में ( अ इ उ ऋ ए ओ ) क्रम से जोड़ दो । और पहले कर्मों में ( ट् ) जोड़ते जाओ ।

फिर बाद में ( ङ् ) जोड़ते जाओ जब तक कि दश लकार पूरे न हो जाएँ ।

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#इन_लकारों_के_काल_ये_हैं :-
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(१) #लट्_लकार = वर्तमान काल ।
जैसे :- राम खेलता है।
       रामः क्रीडति ।
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(२) #लिट् = अनद्यतन परोक्ष भूतकाल । जो अपने साथ न घटित होकर किसी इतिहास का विषय हो ।
जैसे :-
राम ने रावण को मारा था ।
रामः रावणं जघान,,

जघान जघ्नतुः जघ्नुः
जघनिथ जघ्नथुः जघ्न
जघान जघ्निव जघ्निम
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(३) #लुट्_लकार = अनद्यतन भविष्यत काल । जो आज का दिन छोड़ कर आगे होनो वाला हो ।
जैसे :-
राम परसों विद्यालय नहीं जायेगा ।
रामः परश्वं विद्यालयं न गन्ता |
गन्ता गन्तारौ गन्तारः
गन्तासि गन्तास्थः गन्तास्थ
गन्तास्मि गन्तास्वः गन्तास्मः
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(४) #लृट्_लकार = सामान्य भविष्य काल । जो आने वाले किसी भी समय में होने वाला हो ।
जैसे :-
राम यह कार्य करेगा ।
रामः इदम् कार्यम् करिष्यति।
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(५) #लेट्_लकार = यह लकार केवल वेद में प्रयोग होता है ईश्वर के लिए क्योंकि वह किसी काल में बंधा नहीं है ।
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(६) #लोट्_लकार = ये लकार आज्ञा, अनुमति लेना, प्रशंसा करना, प्रार्थना आदि में प्रयोग होता है ।
जैसे :- आप जाओ -भवान् आगच्छतु , वह खेले -सः क्रीडतु , तुम खाओ - त्वं खाद , क्या मैं बोलूँ -किम् अहं वदानि ?
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(७) #लङ्_लकार = अनद्यतन भूत काल । आज का दिन छोड़ कर किसी अन्य दिन जो हुआ हो ।
जैसे :-
आपने उस दिन भोजन पकाया था - भवान् तस्मिन् दिने भोजनं अपचत् ।
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(८) #लिङ्_लकार = इसमें दो प्रकार के लकार होते हैं :--

#आशीर्लिङ्= किसी को आशिर्वाद देना हो ।

जैसे :-
आप जीओ - भवान् जीवेत्।
तुम सुखी रहो।त्वं सुखी भव । आदि

#विधिलिङ् = किसी को विधी बतानी हो ।
जैसे :-
आपको पढ़ना चाहिए - भवान् भठेत्।
मुझे जाना चाहिए - अहं गच्छेयम् ।
आदि ।
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(९) #लुङ्_लकार = सामान्य भूत काल । जो कभी भी बीत चुका हो ।
जैसे :-
*उसने खाना खाया - सः भोजनं अखादीत् ।*
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(१०) #लृङ्_लकार = ऐसा भूत काल जिसका प्रभाव वर्तमान तक हो । जब किसी क्रिया की असिद्धी हो गई हो ।
जैसे :-
यदि वह पढ़ता तो विद्वान बनता । -
यदि सः अपठिष्यत् तु विद्वान् अभविष्यत्।

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इन्हीं लकारों में सभी धातुरूप चलते हैं ।
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🚩जयतु संस्कृतम् ।। जयतु भारतम् ।। जयतु आर्यावर्तम् ।।🚩

Thursday, February 22, 2018

भारत के मुख्य दिनांक तालिका (कैलेण्डर)

भारत के मुख्य कैलेण्डर
१. स्वायम्भुव मनु (२९१०२ ई.पू.) से-ऋतु वर्ष के अनुसार-विषुव वृत्त के उत्तर और दक्षिण ३-३ पथ १२, २०, २४ अंश पर थे जिनको सूर्य १-१ मास में पार करता था। उत्तर दिशा में ६ तथा दक्षिण दिशा में भी ६ मास। (ब्रह्माण्ड पुराण १/२२ आदि)
इसे पुरानी इथिओपियन बाइबिल में इनोक की पुस्तक के अध्याय ८२ में भी लिखा गया है।
२. ध्रुव-इनके मरने के समय २७३७६ ई.पू. में ध्रुव सम्वत्-जब उत्तरी ध्रुव पोलरिस (ध्रुव तारा) की दिशा में था।
३. क्रौञ्च सम्वत्-८१०० वर्ष बाद १९२७६ ई.पू. में क्रौञ्च द्वीप (उत्तर अमेरिका) का प्रभुत्व था (वायु पुराण, ९९/४१९) ।
४. कश्यप (१७५०० ई.पू.) भारत में आदित्य वर्ष-अदितिर्जातम् अदितिर्जनित्वम्-अदिति के नक्षत्र पुनर्वसु से पुराना वर्ष समाप्त, नया आरम्भ। आज भी इस समय पुरी में रथ यात्रा।
५. कार्त्तिकेय-१५८०० ई.पू.-उत्तरी ध्रुव अभिजित् से दूर हट गया। धनिष्ठा नक्षत्र से वर्षा तथा सम्वत् का आरम्भ। अतः सम्वत् को वर्ष कहा गया। (महाभारत, वन पर्व २३०/८-१०)
६. वैवस्वत मनु-१३९०२ ई.पू.-चैत्र मास से वर्ष आरम्भ। वर्तमान युग व्यवस्था।
७. वैवस्वत यम-११,१७६ ई.पू. (क्रौञ्च के ८१०० वर्ष बाद)। इनके बाद जल प्रलय। अवेस्ता के जमशेद।
८. इक्ष्वाकु-१-११-८५७६ ई.पू. से। इनके पुत्र विकुक्षि को इराक में उकुसी कहा गया जिसके लेख ८४०० ई.पू. अनुमानित हैं।
९. परशुराम-६१७७ ई.पू. से कलम्ब (कोल्लम) सम्वत्।
१०. युधिष्ठिर काल के ४ पञ्चाङ्ग-(क) अभिषेक-१७-१२-३१३९ ई.पू. (इसके ५ दिन बाद उत्तरायण में भीष्म का देहान्त)
(ख) ३६ वर्ष बाद भगवान् कृष्ण के देहान्त से कलियुग १७-२-३१०२ उज्जैन मध्यरात्रि से। २ दिन २-२७-३० घंटे बाद चैत्र शुक्ल प्रतिपदा।
(ग) जयाभ्युदय-६मास ११ दिन बाद परीक्षित अभिषेक २२-८-३१०२ ई.पू. से
(घ) लौकिक-ध्रुव के २४३०० वर्ष बाद युधिष्ठिर देहान्त से, कलि २५ वर्ष = ३०७६ ई.पू से कश्मीर में (राजतरंगिणी)
११. भटाब्द-आर्यभट-कलि ३६० = २७४२ ई.पू से।
१२. जैन युधिष्ठिर शक-काशी राजा पार्श्वनाथ का सन्यास-२६३४ ई.पू. (मगध अनुव्रत-१२वां बार्हद्रथ राजा)
१३. शिशुनाग शक-शिशुनाग देहान्त १९५४ ई.पू. से (बर्मा या म्याम्मार का कौजाद शक)
१४. नन्द शक-१६३४ ई.पू. महापद्मनन्द अभिषेक से। ७९९ वर्ष बाद खारावेल अभिषेक।
१५. शूद्रक शक-७५६ ई.पू.-मालव गण आरम्भ
१६. चाहमान शक-६१२ ई.पू. में (बृहत् संहिता १३/३)-असीरिया राजधानी निनेवे ध्वस्त।
१७. श्रीहर्ष शक-४५६ ई.पू.-मालव गण का अन्त।
१८. विक्रम सम्वत्-उज्जैन के परमार राजा विक्रमादित्य द्वारा ५७ ई.पू. से
१९. शालिवाहन शक-विक्रमादित्य के पौत्र द्वारा ७८ ई.से।
२०. कलचुरि या चेदि शक-२४६ ई.
२१. वलभी भंग (३१९ ई.) गुजरात के वलभी में परवर्त्ती गुप्त राजाओं का अन्त।

Saturday, January 20, 2018

सुकून बनारस, जान बनारस और हमारी पहचान बनारस

सुकून बनारस, जान बनारस और हमारी पहचान बनारस
ध्यानीयों का ध्यान बनारस
ज्ञानीयों का ज्ञान बनारस
प्रेमीयों का प्रेम बनारस
संयासीयों का ठाव बनारस
देवताओं का धाम बनारस
विद्या का है खान बनारस
अन्नपूर्णा का स्नेह बनारस
अडभंगी भोलेनाथ बनारस
घाटो का कतार बनारस
साडों का घर-द्वार बनारस
कचौडी पुडी भांग बनारस
लंका गिरजाघर चौक बनारस
ठंडई, लस्सी पान बनारस
गंगा का है धार बनारस
वाह बनारस वाह बनारस
जय बनारस, जय बनारस
- डॉ मुकेश ओझा
😊😊😊😊
।। मनुर्भव ।।