Friday, December 20, 2019
किसके यहाँ भोजन न करें।
Monday, December 16, 2019
उदास सेल्समैन सिर्फ कफन बेच सकता है-भारतीय
Friday, December 13, 2019
नुक्ता
नुक़्ता देवनागरी, गुरमुखी और अन्य ब्राह्मी परिवार की लिपियों में किसी व्यंजन अक्षर के नीचे लगाए जाने वाले बिंदु को कहते हैं। इस से उस अक्षर का उच्चारण परिवर्तित होकर किसी अन्य व्यंजन का हो जाता है। मसलन 'ज' के नीचे नुक्ता लगाने से 'ज़' बन जाता है और 'ड' के नीचे नुक्ता लगाने से 'ड़' बन जाता है। नुक़्ते ऐसे व्यंजनों को बनाने के लिए प्रयोग होते हैं जो पहले से मूल लिपि में न हों, जैसे कि 'ढ़' मूल देवनागरी वर्णमाला में नहीं था और न ही यह संस्कृत में पाया जाता है। अरबी-फ़ारसी लिपि में भी अक्षरों में नुक़्तों का प्रयोग होता है, उदाहरणार्थ 'ر' का उच्चारण 'र' है जबकि इसी अक्षर में नुक़्ता लगाकर 'ز' लिखने से इसका उच्चारण 'ज़' हो जाता है। इन भाषाओं में ज एवं ज़, दोनों ही शब्द उपलब्ध एवं प्रयोग होते हैं, एनके अलावा एक अन्य ज़ भी होता है जिनके लिये निम्न शब्द प्रयोग होते हैं: ज के लिये जीम, ज़ के लिये ज़्वाद (ض)/ज़े (ژ)/ ज़ाल(ذ)/ज़ोए (ظ) - ये चार अक्षर होते हैं। यहां ध्यान योग्य ये है कि चार अक्षर ज़ के लिये होने के बावजूद ज के लिये जीम (ج) होता ही है। अतः जीम का प्रयोग भी होता है, जैसे जज़्बा में ज एवं ज़ दोनों ही प्रयुक्त हैं। ऐसे ही बहुत स्थानों पर ग के लिये गाफ़ (گ) एवं ग़ (غ) के लिये ग़ैन का भी प्रयोग होता है।
मूल रूप से 'नुक़्ता' अरबी भाषा का शब्द है और इसका मतलब 'बिंदु' होता है। साधारण हिन्दी-उर्दू में इसका अर्थ 'बिंदु' ही होता है।
Monday, December 9, 2019
इच्छाओं का नहीं संकल्प का वरण करें।
#इच्छाएँ जीवन को #निरस और #संकल्प जीवन को #सरस बनातीं है।
इच्छाएँ #घास की तरह स्वयं #पनपती रहतीं हैं। और #संकल्प #अन्न की भाँति #लगाने पर फलिभूत होतीं हैं। अतः इच्छाओं के गुलाम न बनों, संकल्प शक्ति के निर्माता बनों।
तुम स्वयं अपने सुख और दुःख के निर्माता हो। यदि इच्छाओं के वसीभूत हो, तो दुःख को वरण कर रहे हो, एवं यदि संकल्प को वरण कर रहे हो तो शास्वत सुख को।
अतः आज ही संकल्प करना सिखों।
मैं संकल्प सिखाता हूँ।
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इच्छाएँ किसी की पूरी नहीं होती-संकल्प किसी के अधूरे नहीं रहते।
-डॉ मुकेश ओझा
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक सलाहकार