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Tuesday, September 18, 2018

ज्योतिष के तीन हिस्से हैं।

ज्योतिष विज्ञान –

ज्योतिष के तीन हिस्से हैं।

अनिवार्य, एसेंशियल, जो बिलकुल गहरा है,  जिसमें कोई अंतर नहीं हो सकता। उसे जानने के बाद उसके साथ सहयोग करने के सिवाय कोई उपाय नहीं है। धर्मों ने इस अनिवार्य तथ्य की खोज के लिए ही ज्योतिष की खोज की।

उसके बाद दूसरा हिस्सा है: सेमी-एसेंशियल, अर्द्ध अनिवार्य। अगर जान लेंगे तो बदल सकते हैं, अगर नहीं जानेंगे तो नहीं बदल पाएंगे। अज्ञान रहेगा, तो जो होना है वही होगा। ज्ञान होगा, तो ऑल्टरनेटिव्स हैं, विकल्प हैं, बदलाहट हो सकती है।
और तीसरा सबसे ऊपर का सरफेस, वह है: नॉन-एसेंशियल। उसमें कुछ भी जरूरी नहीं है। सब सांयोगिक है।

आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च।
पञ्चैतान्यपि सृज्यन्ते गर्भस्तस्यैव देहिनाः।।

सुख और दुख अर्ध अनिवार्य है।
लडाई झगडा, चलना, उठना, आदि विभिन्न प्रकार की क्रियाएँ अअनिवार्य है। सांयोगिक है।