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Tuesday, December 31, 2019

संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्

संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्।
देवा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते।।
अर्थात- हम सब एक साथ चलें; एक साथ बोलें; हमारे मन एक हों। प्राचीन समय में देवताओं का ऐसा आचरण रहा इसी कारण वे वंदनीय हैं।

ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै।
तेजस्वि नावधीतमस्तु। मा विद्विषावहै।
ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:।।

अर्थ :
हे परमात्मन् ! आप हम दोनों गुरू और शिष्य की साथ- साथ रक्षा करें , हम दोनों का पालन-पोषण करें, हम दोनों साथ-साथ शक्ति प्राप्त करें,हमारी प्राप्त की हुई विद्या तेजप्रद हो, हम परस्पर द्वेष न करें, परस्पर स्नेह करें।

शब्दार्थ :
ॐ = परमात्मा-परमेश्वर-परमब्रम्ह ;
नौ = हम दोनों (गुरू और शिष्य) को ;
सह = साथ-साथ ;
भुनक्तु = पोषित हों ; सह =साथ-साथ ;
वीर्यं = शक्ति को ;
करवावहै = प्राप्त करें ;
नौ = हम दोनों की ;
अवधीतम् =पढी हुई विद्या ;
तेजस्वि = तेजोमयी ; अस्तु = हो ;
मा विद्विषावहै = (हम दोनों) परस्पर द्वेष न करें।